कविता-मेरा मेवाड़ क्षेत्र |
लेखक – अंकित प्रकाशचंद्र मेवाड़ा (पत्रकार एवं समपादक संचालक मेवाड़ टुडे न्यूज़ नेटवर्क और जेड वर्ल्ड ग्रुप कंपनी )
ये मेरे राजस्थान का मेवाड़ हैं यहां सिर्फ़ रेत नहीं
यहां पाई जाती हैं अरावली पर्वत मालाएं भी यहां पाई जाती ब्राह्मणी, एरू, मैनाली, और बनास नदी की धराए भी
जहाँ की बोली में बीचोर के गुलाबजामुन, और सवाईपुर के मावे की मिठास नज़र आती हैं
बीगोद के लोहे और बिजौलियां के पत्थर की मजबूती यहां के हर व्यक्ति में पायी जाती हैं
पौराणिक राजस्थानी इतिहास के मांडलगढ़ किले में हैं बंधन भी ,और मेवाड़ का प्रयाग राज यहां पर हैं त्रिवेणी संगम भी
सावन तिलस्वां महादेव का त्यौहार हैं, नवरात्रि में माँ जोगणियां का सजता दरबार हैं
राम-राम सा करके होता यहां पर आदर और सत्कार हैं”
यहां के रखवाले मेनाल, बानोड़ा कोटड़ा बालाजी सरकार हैं
मेवाड़ की शान हमारा बेगूं राजस्थान हैं
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पत्रकार अंकित प्रकाशचंद्र मेवाड़ा बनेंगे आवाज हर किसान की, मजदूर की, एवं निम्न वर्ग की